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डॉ. विनय कुमार चौधरी जी का रचना संसार

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डॉ. विनय कुमार चौधरी कद से छोटे का अंधकार कद से छोटे का अहंकार बड़ा होता है, आदमी कुछ नहीं सरोकार बड़ा होता है; लोग क्योंकर यहाँ नफ़रत के बीज बोते हैं? ये जानते हुए कि प्यार बड़ा होता है; याद रहता न वो चेहरा, न जिसमें दाग़ कोई, चाँद होकर भी दागदार, बड़ा होता है; अपने दायित्व को, कर्तव्य को भुला बैठे, उसपे कहते हैं कि अधिकार बड़ा होता है; तेज भी चाहिये सूरज - सा चमकने के लिए, मरे हुए पे अंधकार बड़ा होता है। लोक शास्त्र के बीच लोक शास्त्र के बीच खत्म हो सकती कभी लड़ाई क्या? सदियों का शोषक, हो सकता आज अचानक भाई क्या? भाग्य और भगवान, कर्मफल की धारणा प्रतिष्ठित की, ऐसे कथित देवता से हो सकती कभी भलाई क्या? ओ समाज के पीड़ित बहुजन, पहचानो अपनी ताकत, बिना प्रयत्न पाट सकते मंजिल की कठिन चढ़ाई क्या? तुम हनुमान बनो तो सोने की लंका भी ढह सकती, काम तुम्हारा कर दे सकता केवल राम दुहाई क्या? सबका मालिक एक अगर है समदृष्टि भी रक्खेगा, वर्गभेद या वर्ण भेद की बही गड़ेगा खाई क्या? साक्षर - शिक्षित की महिमा को तुम न पहचानोगे, मेट सकोगे क्या लिलार पर जमी युगों की काई क्या? जो पर्वत श्रृंखला की तरह जो पर्वत श्रृं...

प्रतिभा कुमारी जी की रचनाएं

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प्रतिभा कुमारी  गजल 1. पहेलियाँ ऐसे मत बुझाया कर। रंजिशें हो तो खुलकर बताया कर। जो दिखता है पूरा सच नहीं होता, लाइव कभी वो सच भी दिखाया कर। देखो ऊपर वाले सब देखते हैं, नेकी कर,दरिया में डाल आया कर। झूठ व फरेब का यूँ स्वांग रचा कर, अपने हक में न सबूत जुटाया कर। साबित क्या करना चाहते हो बता, जो दिल में छुपा, जुबां पर लाया कर। सुर्खियाँ बटोरने के चक्कर में तुम, रिश्तों को दाँव पर मत लगाया कर। अभी उम्र है कैरियर बनाने की, किताबों से जी भर दिल लगाया कर। फेसबुक,गेम,इंस्टाग्राम की लत में, सुनहरे भविष्य को मत भुलाया कर। माँ- बाप तेरा भला ही सोचेंगे, सवाल इनकी फिक्र पर मत उठाया कर। सुन,जीतकर भी सब हार जाओगे, गेम अपनों से मत आजमाया कर। लिखने वाले तो सच ही लिखेंगे, तू पढ़कर इसे दिल से न लगाया कर। 2. मुझे जीने की तू दुआ न दे। ऐ खुदा तू ऐसी सजा न दे । अभी राख में है शोले बहुत, इसे बेरूखी की हवा न दे। है मोम सी अभी हर आरजू, ये तपिश इसको घुला न दे। तुझे सौंपे थे वो जिस यकीन से, उस उम्मीद का ये सिला न दे  उस भरोसे का तो मान रख, उस आत्मा को यूँ दगा न दे। लुटे हसरतों के मजार पर, उम्मीद की कोई...