प्रभाष बहरदार जी की रचनाएं
प्रभाष बहरदार क्या यही जवानी है? भविष्य खोज रहे हो नवीन-हथियारों में तितलियाँ उड़ाते हो मोहक गलियारों में नवयुग-निर्माता की क्या यही निशानी है? क्या यही जवानी है? इस क्रूरतम-काल में वीरता दबाते हो देश की रक्षा हेतु विनय-गान गाते हो सुभाष और भगत की क्या यही कहानी है? क्या यही जवानी है? अगर वीर-जवान हो जवानी की कसम है सिद्ध कर अपनी शक्ति तुझमें कितना दम है अबोध बालक-सा यह अरे, क्या नादानी है? क्या यही जवानी है? उसका नाम जवानी है गिर-गिर कर संभलना तुम संभल-संभल क...