नीतु बाबू जी की कविताएं साहित्य कोसी ब्लॉग पर

नीतु बाबू


शब्द 


शब्द भी हुआ लज्जित 

क्या रुप ग्रहण किया?

शब्द! जो मान दिलाता

शब्द! जो शान बनाता 

शब्द! जो अभिमान कराता 

शब्द जो,जो न दिखाता 

आखिरकार! 

शब्द भी हुआ लज्जित।


शब्द! विचरण करता है,

शब्द! वाक्य बनाता

शब्द! आपकी पहचाना कराता 

शब्द! शिक्षा का भान कराता 

शब्द! लाज बचाता 

शब्द! आपका संस्कार दिखाता 

शब्द को समझिए 

आखिरकार शब्द आपको महान बनाता है।


चर्चाओं में चर्चा 

उछाला गया शब्द का पर्चा 

दिखाई गई अपनी औकात 

खोला गया शब्द–जिहाद 

किया गया शब्दों का मारम–मार 

दी गई कुत्सित मानसिकता की पहचान 

दिखाया गया अपने ही घरों का नंगा नाम

देश को किया सरेआम बदनाम।


लज्जित हुआ,बेचारा शब्द–तार 

गूंगे को भी शब्द ने पकड़ा 

संस्कारों को झूठी शान ने जकड़ा 

मानस को राजनीति ने लकड़ा 

इज्जत को शब्द ने तोड़ा 

भूक्खर की भूख गाली में निकला 

आखिरकार शब्द ने रंग बदला

अपने ही घरों में बेढंग होना सीखा।



समय और समाज


नृशंस समय में प्रेम करना अपराध है

दुखी समाज में खुश रहना सपराध है

वचालों के वंश में चुप रहना बेकार है 

दूरियों के बीच नजदीकियां खराब है।


क्या प्रेम केवल कविता में रह गया है?

क्या संवेदना केवल दिखावे में दिख गई है?

क्या इंसानों में इंसानियत मर गई है?

क्या ज़माने में ज़मीर जड़ गया है?


युद्ध समय में प्रेम करना आसार है 

बहस समय में विवाद करना अधिकार है 

उम्मीद समय में पार पाना आसान है 

विकट समय में धैर्य पाना मजार है।


क्या सुखी व्यक्ति सुख देख पाता है?

क्या दुखी व्यक्ति दुख दूह पाता है?

क्या थर!थका पाता है?

क्या इंसान!इंसान बना पाता है?


लड़ने वालों से लड़ा जा सकता है 

सकने वालों से सका जा सकता है 

रोने वालों से रोया जा सकता है 

हंसने वालों से हंसा जा सकता है।


क्या समझाने पर समझा जा सकता है?

क्या रुलाने पर रोया जा सकता है?

क्या उखाड़ने पर उखाड़ा जा सकता है?

क्या मनाने पर मनाया जा सकता है?


बेवजह उलझना नहीं चाहिए 

रंग में भंग डालना नहीं चाहिए 

खालीपन में खलल खलना नहीं चाहिए 

जीवन में जीवंत होना चाहिए।


क्या सड़न में सड़ना चाहिए? 

क्या कविता में काव्य होना चाहिए?

क्या रस में रास होना चाहिए?

क्या साज में समझ होनी चाहिए?



दोस्ती


दोस्ती दिवास्वप्न 

दोस्ती दयास्वप्न 

दोस्ती आजादी स्वप्न 

दोस्ती हर स्वप्न 

दोस्ती जीवन स्वप्न।


दोस्ती में दोस्ती पाया 

प्यार में दोस्ती काया 

यार में दोस्ती आया 

साथ में दोस्ती साया 

आया में दोस्ती पाया।


वैसे तुम मेरा प्यार हो 

पर दोस्ती वाला यार हो 

रहते हो हर पल साथ मेरे 

करते हो हर पल बात मेरे 

देखते हो हर पल हाल मेरे।


दोस्त तुम हो 

यह मैंने जाना 

हर रूप है तेरा 

यह जग ने देखा 

साथ हो तुम, यह सब ने माना।


कल की परछाई है दोस्ती 

कल की रूबाई है दोस्ती 

कल की जगाई है दोस्ती 

कल की मुस्काई है दोस्ती 

कल की रोपाई है दोस्ती।


बेशक प्यार हो तुम 

पर दोस्ती बनाए रखना 

साथी हो तुम,साथ निभाए रखना 

रति हो तुम,साथ चलाए रखना 

दोस्त हो तुम, दोस्ती निभाए रखना।


दोस्ती हीरा–स्वप्न 

दोस्ती पीड़ा–हरण 

दोस्ती औषधि–वन

दोस्ती सुख–मिलन 

दोस्ती जीवन संग।



चलना होगा 


मुझे सफर में चलना ही होगा 

चाहे जो कुछ हो जाए 

फिर चाहे सफ़र आसान हो या न हो

लेकिन मुझे चलना होगा!!


ठोकरें खाकर फिर से

मुझको संभलना होगा

कोई आवाज दे अगर 

तब भी रुकना नही मुझको!!


जरूरत पड़ने पे 

रास्ते बदलना पड़े तो 

बदलना होगा हमें

इतना ही नहीं 

रुख मोड़कर 

मुझे आगे निकलना होगा!!


कई लोग लगाएंगे 

मुझपर तोहमतें

तो भी ऐतराज नहीं मुझको

मैं कोई भगवान नहीं 

ये मुझको समझना होगा!!


गिर कर खानी है चोट मुझे 

मालूम है मुझको,

अपने घाव पर 

मरहम खुद ही लगाना होगा!!


चिलचिलाती धूप के साए,

होंगे सर्द हवाओं के झोंके,

हर रुकावट से होकर 

मुझको गुजरना होगा!!


हां मेरे मन की 

व्याकुलता ,चंचलता 

बाधा बनेगी ज़रूर,

मगर अपने मन को 

पूर्णत: स्थिर करना होगा !!


अपने साए से भी

नहीं रखनी है उम्मीद मुझे 

बस अपने भरोसे पर 

हर कदम फूक—फूक चलना होगा

मुझे हर हाल में चलना होगा

मुझे आगे निकलना होगा !!



इस ब्लाग की रचनाये स्वयं लेखकों के द्वारा दी गई है तथा इन रचनाओं का स्वताधिकार उनके पास है। धन्यवाद।



संक्षिप्त परिचय–             


नाम:–नीतु बाबू 

जन्म:–2 फरवरी 1999

पिता:–भगवान मंडल 

माता:–अंजू देवी 

पता:–गाँव–हरचंदपुर, प्रखंड –जलालगढ़, जिला–पूर्णिया, राज्य–बिहार, 854327

वर्तमान:–शोधार्थी, हिंदी विभाग, पूर्णिया विश्वविद्यालय, पूर्णिया

गतिविधि: गद्य एवं पद निरंतर लेखन। 

प्रकाशित:–भेंट वार्ता, संवदिया, अंग भारत, कथा साहित्य छत्तीसगढ़, अक्षरांजलि पत्रिका, कटिहार जागरण, स्वर्णिम दर्पण पत्रिका, साहित्य नामा ,प्रांति इंडिया, प्रश्न चिन्ह, देहाती दर्पण, नव उदय पत्रिका में रचना, कविता, आलेख, कहानी , समीक्षा आदि प्रकाशित।

शिक्षा:–हिंदी में स्नातकोत्तर पूर्णिया विश्वविद्यालय, पूर्णिया , रूरल डेवलपमेंट में स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा इग्नू (दिल्ली) से, योगा ट्रेनर। 

अन्य शिक्षा:– ए.डी.सी.ए, tally kitt (पटना), स्काउट गाइड उपाधि, बेसिक ब्यूटीशियन मास्टर ट्रेनर (युवा परिवर्तन) मुंबई ।


प्रकाशित रचना:–काव्य–संग्रह

                        1. नीमन

                        2. तू चहिए 

                        3. तू भी तो मैं ही हूं। 

                        4. मानविका


साझा काव्य–संग्रह:–1.'किरदार एक नई सोच’ 

                              2. ‘श्याम रस धारा ’

3. शब्द कलश पत्रिका 

4. मनरंग


कहानी प्रकाशित:1.‘कराह’ , 

                         2.कतार का अंतिम शख्स,  

                         3.आटा चावल का । 


साझा–कहानी संग्रह–‘‘पिता–छांव सा साथ" में संकलित कहानी :–(पिता के साए में बेटियां)

                          

सम्मान–1.राज किशोर स्मृति सम्मान। 

            2.स्वर्णिम भारत रत्न अटल सम्मान–2024,

            3.टॉपर छात्र का सम्मान–2023

            4.एन.आर.एल.एम वेस्ट कर्मी पुरस्कार।

           5. पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति सम्मान । 

           6.मीराबाई स्मृति सम्मान


सफलता हासिल –1.राज्य लोक सेवा आयोग, 

               2.एन.टी.पी.सी, 

               3.नेट,पेट परीक्षा । 



समीक्षा :

1. अपने समय और समाज की शव परीक्षा, लेखक–संजय कुमार सिंह, विधा–उपन्यास –'सपने में भी नहीं खा सका खीर वह'। 

2.कोसी अंचल का ऐतिहासिक दस्तावेज, लेखक–शालिग्राम, विधा–उपन्यास–‘कित आऊँ, कित जाऊँ’ सन् 2008 में राजकमल प्रकाशन । 


आलेख:

1. मनरेगा 

2. हिंदी कहानियों में वृद्ध विमर्श । 

3. AI का दैनिक जीवन में उपयोगिता। 

4. मानवतावादी आत्मनिर्भर विश्व निर्माण के लिए सुलभ साधन। 

5. नागालैंड भाषा, साहित्य और संस्कृति। 

6. 21 वीं सदी हिंदी सिनेमा में स्त्री विमर्श। 

7. हिंदी लेखिकाओं की आत्मकथाओं की कथा। 

8. राष्ट्रीय एकता के प्रतीक पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल । 

9. प्रेम काव्य के रूप में विद्यापति। 

10. पर्यावरणीय स्वास्थ्य नीति। 

11. अंगिका भाषा एवं साहित्य– एक झलक

12. 21 वीं सदी के हिंदी उपन्यासों में सामाजिक चेतना। 


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नीतू बाबू जी के पुस्तकों के छायाचित्र


तू चहिये 
नीतू कुमारी (बाबू)

तू भी तो
मैं ही हूं

नीतू कुमारी (बाबू)

नीमन
नीतू कुमारी (बाबू)

मानविका
नीतू बाबू


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