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नीतु बाबू जी की कविताएं साहित्य कोसी ब्लॉग पर

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नीतु बाबू शब्द   शब्द भी हुआ लज्जित  क्या रुप ग्रहण किया? शब्द! जो मान दिलाता शब्द! जो शान बनाता  शब्द! जो अभिमान कराता  शब्द जो,जो न दिखाता  आखिरकार!  शब्द भी हुआ लज्जित। शब्द! विचरण करता है, शब्द! वाक्य बनाता शब्द! आपकी पहचाना कराता  शब्द! शिक्षा का भान कराता  शब्द! लाज बचाता  शब्द! आपका संस्कार दिखाता  शब्द को समझिए  आखिरकार शब्द आपको महान बनाता है। चर्चाओं में चर्चा  उछाला गया शब्द का पर्चा  दिखाई गई अपनी औकात  खोला गया शब्द–जिहाद  किया गया शब्दों का मारम–मार  दी गई कुत्सित मानसिकता की पहचान  दिखाया गया अपने ही घरों का नंगा नाम देश को किया सरेआम बदनाम। लज्जित हुआ,बेचारा शब्द–तार  गूंगे को भी शब्द ने पकड़ा  संस्कारों को झूठी शान ने जकड़ा  मानस को राजनीति ने लकड़ा  इज्जत को शब्द ने तोड़ा  भूक्खर की भूख गाली में निकला  आखिरकार शब्द ने रंग बदला अपने ही घरों में बेढंग होना सीखा। समय और समाज नृशंस समय में प्रेम करना अपराध है दुखी समाज में खुश रहना सपराध है वचालों के वंश में च...

अवधेश कुमार झा "अवध" जी की कृतियां

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अवधेश कुमार झा "अवध"      राष्ट धर्म                   राष्ट्रधर्म के बिना जगत में,सब धर्म होते  बेकार राष्ट्र हुआ रक्षित ही नहीं ,फिर महल लगे बेकार राष्ट्र मात्र भूखंड नहीं, संस्कृति का संवाहक है रक्षित होते जीव यहां, हित रक्षा का वाहक है सार्वभौम वह राष्ट जहां पर न्याय प्रिय सरकार राष्ट्रधर्म के बिना जगत में,सब धर्म होते  बेकार राष्ट्र की रक्षा सर्वोपरि ,भले देना पड़े बलिदान राष्ट्र प्रेम में जीवन अर्पित, ये जीवन का सम्मान राष्ट्र अगर खुशहाल  रहे,सब धर्म फलित साकार राष्ट्रधर्म के बिना जगत में,सब धर्म होते  बेकार राष्ट्र की भूमि माता है,अपनों का करती पोषण राष्ट्र वही अच्छा  जहां न होते किसी का शोषण लगे भ्रष्टता रोग अगर तो , हो जाते राष्ट  बीमार राष्ट्रधर्म के बिना जगत में,सब धर्म होते  बेकार राष्ट्र की शक्ति जनता है,जनमत होता बहुमूल्य सबको न्याय मिले तो होता धर्म सभी समतुल्य सत्य के संवाद से ही, खुले शांति का हर द्वार राष्ट्रधर्म के बिना जगत में,सब धर्म होते...