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अवधेश कुमार झा "अवध" जी की कृतियां

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अवधेश कुमार झा "अवध"      राष्ट धर्म                   राष्ट्रधर्म के बिना जगत में,सब धर्म होते  बेकार राष्ट्र हुआ रक्षित ही नहीं ,फिर महल लगे बेकार राष्ट्र मात्र भूखंड नहीं, संस्कृति का संवाहक है रक्षित होते जीव यहां, हित रक्षा का वाहक है सार्वभौम वह राष्ट जहां पर न्याय प्रिय सरकार राष्ट्रधर्म के बिना जगत में,सब धर्म होते  बेकार राष्ट्र की रक्षा सर्वोपरि ,भले देना पड़े बलिदान राष्ट्र प्रेम में जीवन अर्पित, ये जीवन का सम्मान राष्ट्र अगर खुशहाल  रहे,सब धर्म फलित साकार राष्ट्रधर्म के बिना जगत में,सब धर्म होते  बेकार राष्ट्र की भूमि माता है,अपनों का करती पोषण राष्ट्र वही अच्छा  जहां न होते किसी का शोषण लगे भ्रष्टता रोग अगर तो , हो जाते राष्ट  बीमार राष्ट्रधर्म के बिना जगत में,सब धर्म होते  बेकार राष्ट्र की शक्ति जनता है,जनमत होता बहुमूल्य सबको न्याय मिले तो होता धर्म सभी समतुल्य सत्य के संवाद से ही, खुले शांति का हर द्वार राष्ट्रधर्म के बिना जगत में,सब धर्म होते...