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कैलाश बिहारी चौधरी जी के गीत

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  कैलाश बिहारी चौधरी बरसात का मौसम है थोड़ी देर ठहर जाओ, बरसात का मौसम है। कब कहा से आए बादल,  कब कैसे बरस जाये। कब तक बरसे बादल, कुछ कहा नहीं जाए। थोड़ी देर ठहर जाओ, बरसात का मौसम है। कजरारे काले बादल, दिगंत में छा गए हैं। बिजली चमक रही है, छटाये गरज रही है। थोड़ी देर ठहर जाओ, बरसात का मौसम है। यहाँ - वहाँ , जहाँ - तहाँ , कीचड़ ही कीचड़ है। जल का जमाव है, आया बरसात है। थोड़ी देर ठहर जाओ, बरसात का मौसम है। किसको अपनी व्यथा सुनायें  इस जीवन में कितना गम है। सोच - सोच घबराता मन, किसको अपनी व्यथा सुनायें । आपस के सम्बन्ध हमारे, कभी ये बनते, कभी बिगड़ते, स्वार्थ भरी यह दुनिया लगती, किसको अपनी व्यथा सुनायें । नये दौड़ की चकाचौंध में, नैतिकता यूँ घटती जाती। ख़ुद को अब हैरान यहाँ हुँ , किसको अपनी व्यथा सुनायें । कौन सुनेगा, किसे सुनायें, कौन सगा है, मुझे बतायें। किसको अपनी व्यथा सुनायें। गीत उमंगों से गाता हूँ  व्यथित हृदय से कविता करता, निज भावों को सहलाता हूँ। दुख दर्दों में हसता रहता, मुसीबतों से टकराता हूँ। कोशिश यूँ ही करता रहता, स्वयं सफल हो जाता हूँ।    उत्...