जल - ई. आलोक राई
जल एक अमुल्य संसाधन होने के साथ साथ हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है जिसे हम उपयोग में लाते है और बिना इसके हमारा जीवन असम्भव है। यह जीवन देने के साथ साथ अपने गुण जो किसी भी चीज में अपना उसी आकार में ढलना सिखाती है की इसके पार्दर्सीता गुण के साथ साथ स्थिति अनुसार हो जीवनदायी होना। यह जीवनदायी है तो जीवन लेती भी है। जल पर मेरी यह कविता आपके समक्ष प्रस्तूत है
धन्यवाद।
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| ई. आलोक राई |
जल
जल श्रोत भू पर
वाष्पित हो बनता बादल
रचता दृश्य इन्द्रधनुष
वाष्पित हो बनता बादल
रचता दृश्य इन्द्रधनुष
अम्बर से बरस-बरस
पहुँचे धरती पर
करता माटी गीली
अंकुर लेते बीज
फैलती हरियाली
चहो दिशा
बहती शीतल सी पवन
पेय है जल
भोजन में प्रयुक्त जल
सफाई मे उपयुक्त जल
कृषि न होता बिन जल
बहुत उपयोगी है जल
जरुरी इसका संरक्षण
जल ही जीवन
जल श्रोत भू पर
बड़ा निर्मल
रचता सृष्टि आधार
..........................
इस ब्लॉग की रचनाये स्वयं कवियों/लेखकों द्वारा दी गई है तथा इन रचनाओं का स्वताधिकर उनके पास है। धन्यवाद।
संक्षिप्त परिचय
नाम : ई. आलोक राई
पिता : ध्रुव नारायण सिंह राई
पता : स्थान - त्रिवेणीगंज, जिला - सुपौल, राज्य - बिहार, पिन - 852139
शिक्षा - बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग
पत्रिकाओं में- क्षणदा (त्रैमासिक), जन आकांक्षा (जन लेखक संघ की केंद्रीय पत्रिका), संवदिया (त्रैमासिक)तथा कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्रकाशित
सम्मान - जन साहित्य सम्मान 2024, जन लेखक संघ के द्वारा प्राप्त हुआ है, साथ ही कुछ सम्मेलनों के प्रमाणपत्र हैं।
प्रकाश्य कृति - फिसलती रेत (विद्या - काव्य लेखन)
संपर्क सूत्र:- 9117675610
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| यादों से कुछ पन्ने/महाकवि ध्रुव स्मृति |
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